संविधान दिवसके सन्दर्भ

केवि चौधरी

केवि चौधरी
हर साल कुवाँर (असोज) ३ गतेक् डिन्वा संविधान दिवस मनाजाइठ । असौंफे सरकारी गैरसरकारी तह ओ कार्यालयहुक्र संविधान दिवस मनैना तयारी कैरख्ल । वस्तक बहुट संघसस्था संविधान दिवस आंशिक रुपम मनैना अस माझधार म बट कलसे विभिन्न जातिय संघसस्था ओ राजनैतिक दलहुक्र बहिस्कार कैख कर्या डिनके रुपम मनैना निर्णय समेत कैरख्ल । असिन पस्थितिम हम्र यी विषयहँ कसिक लेना ? प्रश्न जर्मल बा । हम्र डान्चे गम्भिर होक छलफल कर्ना ओ निकासके डग्रीओंर नाम पर्ना बा ?
खास कैख नेपालम अविकास ओ विभेदहँ हटैना कैख हुइलक् बहुट मेह्रिक मेह्रिक आन्दोलनके जगम बनल यी संविधान कुछहद्सम कार्यान्वयमनम आ स्याकल बा । याकर पूर्ण बैद्यवा कायम कर्टि पुरा कायान्वयन कर पर्ना आझुक आवश्यक्ता हो । आज हमार विचम लोकसेवा आयोगके विज्ञापन फरक होख विवादित हुइल अवस्था बा । थारु आयोग लगायत आउर आयोग अपुर्णता बा । सामाजिक, साँस्कृतिक अधिकारके विषय संकुचित हुइल बा । सामाजिक, साँस्कृतिक अधिकारके विषय संकुचित हुइल बा । सामाजिक न्याय, सहितके संमृद्धिम ठ्यास लागल बा । विकेन्द्रीत ओ बहुलबादी समाज ओ संरचनाके परिकल्पना कैगेलसे फे केन्द्रीकृत एकल जातिय मानसिक्ताके कारण समस्या आइल बा । सहभागिता ओ समावेशिताके विषयम अलपत्र पर्नाअस बा । बहुट छलफल कैख बनागैल संवैधानिक व्यवस्थाके कार्यान्वयनम ओ अवाश्यक्ता अनुसार परिमार्जन संसोधन कर्टि जाइपर्ना आझुक आवश्क्ता हो ।
असौंक संविधान दिवसके सन्दर्भमा खास खास असहमतिके विषयह बुझ्ना ओ बुझैना काम कर्लसे मजा हुइने रह ।
जय गुर्वावा !
(अखिसके अग्रासन साप्ताहिकके सम्पादकीय)

दंगीशरण खबर

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