विकास व समृद्धिके लाग सुशासन

भुवन चौधरी

पृष्ठभुमी
विश्वम मानव अधिकारक अवधारणाके विकास संगसंग सन् १९९० के दशकयहोंर व्यापकरूपम प्रयोगम अइलक शव्दावली सुशासन वास्तवम परम्परागत शक्ति केन्द्रित सरकारक संयन्त्रके घ्यारासे बाहर आख एक्ठो वेल्फेयर स्टेटके शासकीय अवधारणाम लन्लक मुद्धा हो । कौनो फे सरकारक प्रमुख काम कलक शासन संचालन कर्ना हो, जुन बात उ राज्यम बैठना आम नागरिकहुुकन्हक परिवर्तित आवश्यकता, राजनीतिक प्रतिवद्धता ओ सरकारक विभिन्न निकायहुुक्र देना सेवा प्रवाहसे संवन्धित विषयवस्तुसे ज्वारल रथा । सुशासनके अर्थ उचित शासन, मजा शासन, संमृद्ध शासन हो जौन नागरिकके समग्र कल्याणसे प्रत्यक्ष रुपमा संबन्ध ढरल रथा । शासनक मान्यता कलक राज्यसे प्रशासनिक, आर्थिक ओ राजनीतिकरूपम शासकीय शक्तिके प्रयोग कैख आम जनतन्हक विकास, हित, कल्याण, भलाई लगायतके विषयवस्तुु सम्बोधन कर्ना काम हो, नकि नागरिक उप्पर शासन कर्ना ।


नेपालक संविधान २०७२ के धारा ५१ (४) म सार्वजनिक प्रशासनह स्वच्छ, सक्षम, निष्पक्ष, पारदर्शी, भ्रष्टाचारमुक्त, जनउत्तरदायी, र सहभागितामुलक बनैती राज्यसे प्राप्त हुइना सेवा सुविधाम जनतन्हक सरल, समान व सहज पहुँच सुनिश्चित कैख सुशासनक प्रतयाभुती कर्ना प्रावधान बा । नागरिक प्रति उत्तरदायी सरकार बेगर जनजीवनम सुधार आइ निस्याकत कना मान्यताक आधारम विश्वम सुशासन सम्बन्धी धेउर शिद्धान्त व औजार प्रचलनम बाट ।


सुशासन ऐन २०६४ के प्रस्तावनाम मुलुकके सार्वजनिक प्रशासनह जनमुखी, जवाफदेही, पारदर्शी, समावेशी व जनसहभागितामूलक कराख वाकर प्रतिफल सर्वसाधारणह उपलब्ध करैना, कानूनक शासन, भ्रष्टाचारमुक्त व चुस्त प्रशासन, विकेन्द्रीकरण, आर्थिक अनुशासन व सार्वजनिक सेवा व स्रोतके कुशल व्यवस्थापन जसिन असल शासनक आधारभूत मान्यताह आत्मसात् कैख सर्वसाधारण नागरिकहुक्र पाई पर्ना सेवा झट्टसे झट्ट व कम खर्च लग्नामेरसे पइना अवस्था सृजना करक लाग, सुुशासन पइना नागरिकक अधिकारहन व्यवहारम उतारख कार्यान्वयनम लन्ना व प्रशासन संयन्त्रह सेवाप्रदायक संयन्त्र व सहजकर्ताके रुपम रुपान्तरण कैख मुलुकम सुशासनके प्रत्याभुति देना उल्लेख बा । ऐनके परिच्छेद २, दफा ७ म गरीबी निवारण, सामाजिक न्याय, प्राकृतिक व अन्य सार्वजनिक श्रोतक दीगो व्यवस्थापन, लैंगिक विकास, वातावरण संरक्षण, आदिवासी जनजाति, दलित व आर्थीक सामाजिक रुपम पाछ परल वर्ग समुुदायके उत्थान, दुर्गम क्षेत्रके विकास, संतुलित विकास लगायतक नीति सरकार अख्तियार कर्ना उल्लेख करल बा । आस्तहक परिच्छेद ४ दफा (२) म सार्वजनिक चासोके विषय कार्यान्वयन करवेर सरोकारवाला व नागरिक समाजसे परामर्श करपर्ना उल्लेख बा । स्थानीय सरकारसे नागरिकह देना सेवा, कर्लक निर्णय, उठैलक कर, दस्तुर, शुल्क, जरिवाना व राजश्व, संघ संस्था व प्रदेश÷केन्द्र सरकारसे पैलक अनुदान खर्चके अवस्था वाकर पारदर्शिता व नागरिकक माग वमोजिम खर्च हुुइलक विवरण नागरिकहुकन्हक माझम् स्पष्ट पारपर्ठा व नागरिकहुुकन्हक अरजी सम्वोधन, सल्लाह सुझाव ग्रहण कैख कार्यप्रणालीम सुधार लान पर्ठा ।


पारदर्शिता, जवाफदेहिता व उत्तरदायित्व परीक्षणक विभिन्न औजारहरुमसे सार्वजनिक परीक्षण, सामाजिक परिक्षण व सार्वजनिक सुनुवाइ, नागरिक वडापत्र, नागरिक अभिमत पत्र, वहिर्गमन अभिमत, स्थानीय वजेट अनुशीक्षण, लैंगिक समावेशीकरण, गुनासो चौतारी, सामुदायिक अंक तालिका, सामुदायिक सूचना पाटी, गुनासो सम्बोधन आदिके व्यवस्थित प्रयोग कैख सुशासन, सदाचार व विकास प्रवद्र्धन कर सेक्जैठा ।


नेपालम सुशासनके अवस्था व चूनौति
एक दशकसे लम्म्वा आन्तरिक द्वन्द्व, राजनीतिक अस्थिरता, आर्थिक सामाजिक पछौटेपन, अशिक्षा, गरिबी, भ्रष्टाचारके जालम अड्कलक राजनीति व कर्मचारीतन्त्र लगायतक कारण विगतम हमार देश नेपाल सुशासन कायम कर्ना सवालम अपेक्षाकृत उपलब्धी हाशिल कर नै स्याकल । देश शान्ति प्रक्रियाम आइलपाछ सुशासन प्रवद्र्धन कर्ना डग्गरम सुशासन (व्यवस्थापन व संचालन) ऐन, २०६४, नियमावली २०६५ याकर संगसंग सूचनाके हकसम्बन्धी ऐन, २०६४ व नियमावली २०६५ जारी हुुइल बा । यी वाहेक आम नागरिकहुुकन सुशासनके प्रत्याभूति देहक लाग राज्यसे सुशासन रणनीति व कार्ययोजना २०७४ समेत जारी कैराखल । ओस्तहक राज्यसे सुशासनक क्षेत्रम थप प्रयासके रूपम शासकीय सुधारके कार्यक्रम, राज्यके नीति योजनाम सुशासनह प्रश्रय देना, प्रशासकीय सुधारके कार्यक्रमम सुशासन, निजामती सेवाम आरक्षण, नागरिक वडापत्र, मन्त्रालयम शासकीय सुधार इकाईके व्यवस्था कैराखल । याकर संगसंग सामाजिक परिक्षण, सार्वजनिक परिक्षण, सार्वजनिक सुनुवाईके प्रावधान, गुनासो व्यवस्थापनके लाग हेलो सरकार जसिन कार्यक्रम, आयोजनाम जनतन्हक सहभागिता सुनिश्चित कर्ना क्रियाकलाप फे संचालन हुइटी बाट । सुशासनह बढावा देहकलाग समयसमयमा राजनीतिक व प्रशासनिक नेतृत्वसे अइना धारणा व प्रतिवद्धता फे मार्गदर्शकके रूपमा देख परल रलसेफे नेपालके सन्दर्भम सुशासन कायम कर्ना बराभारी चुनौती बा । जेहिहन देहाय वामेजिम प्रस्तुत करल बा ।


(क) सुशासन कायम करक लाग राजनीतिक व प्रशासनिक नेतृत्वम इच्छाशक्तिके कमी देख् परल बा । सुशासनके विषय केवल नारा व भाषणम केल सीमित हुुइलक देख पर्था ।

(ख) सुशासन कायम करक लाग ऐननियम जारी हुुइल रलसेफे विद्यमान ऐननियमके प्रभावकारी कार्यान्वयन हुई नैस्याकल अवस्था बा । सुशासन कायम कर्ना सवालम सरकार व मातहतक मन्त्रालय, विभागहुुक्र जारी कर्ना निर्देशनके परिपालन कर्नाम सरोकारवालाहुुकन्हक ध्यान नैगैल हो ।

(ग) सुशासन कायम करकलाग आवश्यत्ता अनुसार सरकारी संस्थागत संयन्त्र व निकायहुुकन्हक अभाव बा ।

(घ) राज्यसे अख्तियार करलक नीति व उ नीतिहुुकन्हक व्यावहारिक प्रयोगसे तादम्यता मिलल नैदेख परठो ।

(ङ) भ्रष्टाचार न्युनीकरणके जत्रा बात कर्लसेफे राजनीति व कर्मचारीतन्त्रह भ्रष्टाचारके जालमसे मुक्त कर्ना चुनौती बा ।

(च) उत्तरदायित्व, पारदर्शिता, जवाफदेहिताके बात धेउर हुुइल तब्बोपर यी विषयहन सरोकारवाला मनैया व निकायसे आत्मत्वकरण कर्ना कठिनाई बा ।

(छ) कार्यविधिम हुुइलक व्यबस्था अनुुसार प्रकृयागत रुपम जवाफदेहिताके औजारहुुकन्हक (सार्वजनिक सुनुवाइ, सार्बजनिक परिक्षण, सामाजिक परिक्षण लगायत) प्रयोगम तादम्यता मिल्लक देख परल नै हो ।

(ज) ‘सानालाई ऐन, ठुलालाई चैन’ कना कहावट व्यवहारिक रुपम बल्गर हुइटी जाइवेर कानुनी शासनके मर्म अनुरूप राज्यह आघ लैजैना काम कठिन बा ।

(झ) नागरिकके चेतनास्तर आम्हिन बह्र नैस्याकल हो । ज्याकर कारण जनताहुुक्र जागरुक हुइ स्याकल नै हुुइट ।

(ञ) कर्मचारी वर्ग व राजनीतिक व्यक्तित्वम तादम्यता मिल्लक अवस्था नै हो ।

(ट) शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, वातावरण सन्तुलन, जोखिम न्यूनीकरण लगायतक विकासके मुद्दाहुुकन सुशाससे ज्वार स्याकल नै देख जाइठो ।

(ठ) सरकारसे हुुइलक कामकार्वाही उपर सुपरीवेक्षण व नियमन कर्ना निकायके प्रभावकारिता अभिवृद्धि करल नै देख पर्ल हो ।

(ड) नागरिक समाज, पत्रकार, विभिन्न क्षेत्रम आवद्ध पेशाकर्मी व व्यावसायीहुुकन्हक भूमिका सशक्त बनैना चुनौती बा ।


आब का कर्ना ?
(क) राजनीतिक व प्रशासनिक नेतृत्वहुुक्र आपन आपन वाचाप्रति व्यावहारिक रुपम प्रतिवद्ध होख आघ जैना ।

(ख) प्रशासनिक तहके साथसाथ राजनीतिक तहम हुइना भ्रष्टाचार रोकथामके लाग सम्बद्ध निकायहुुकन सुदृढीकरण कर्टी प्रभावकारी संस्थागत संयन्त्रके विकास कर्ना ।

(ग) जारी हुुइलक ऐन, नियम, कानुन व कार्यविधिके प्रभावकारी कार्यान्वयन कर्ना ।

(घ) कर्मचारी प्रशासनह राजनीतिसे मुक्त करैना ।

(ङ) चुस्त दुरुस्त सेवाप्रवाहके लाग आवश्यत्ता अनुसार सरकारके संगठनात्मक संरचना परिमार्जन कर्ना ।

(च) पारदर्शिता, उत्तरदायित्व, जवाफदेहिता जसिन विषयवस्तु केवल कहावटम केल सीमित नै धर्ख व्यवहारम लानक लाग सम्बन्धित सक्कुज प्रतिवद्ध हुइना ।

(छ) कार्यविधिम व्यवस्था हुुइल अनुुसार प्रकृया पुरा कैख जवाफदेहिताके औजारहुुकन्हक प्रयोग कर्ना ।

(ज) नागरिक चेतना, जनसहभागिताह थप सशक्त कर्टी आघ जैना ।

(ञ) नागरिक निगरानी व ओभरसाइट मेकानिज्मह थप मजवुत बनैटी जैना ।

(ट) शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, वातावरण सन्तुलन, जोखिम न्यूनीकरण लगायतक विकासके मुद्दाहुुकन सुशासनसे जोर्ना ।

(ठ) सरोकारवालाहुुक्र आर्थिक सदाचारिता, कानुनी शासनप्रति पूर्ण प्रतिवद्धता, आपन जिम्मेवारीप्रति वफादारिता कायम कर्टी कर्मचारीहुुकन उचित दण्ड व पुरस्कारो व्यवस्था कर्र्ना ।

(ड) कौनो फे सामुदायिक विकास, कानुन निर्माण, कर निर्धारण लगायतक जनतासे प्रत्यक्ष सम्बन्ध हुुइना विषयम लाभग्राहीहुुकन्हक सहभागिताम निर्णय कर्ना ।

(ढ) कार्यालयम सेवाग्राहीमैत्री वातावरण तयार कर्ना, सेवाग्राहीहुुकन्हक अनुरोध सुन्ना व सम्वोधन कर्ना ।

(ण) नागरिकसे अइलक अरजीहुुकन्हक उचित रूपम सम्बोधन कर्ना ।

(त) स्वच्छ व विश्वसनीय न्याय प्रणालीह कायम धर्टी सुचनाके हक व अभिव्यक्ति स्वतन्त्रताके ग्यारेन्टी कर पर्ना ।

(थ) E- Governance ह प्रभावकारी रुपम कार्यान्वयन कर्ना ।

(द) सरकारके शासन संञ्चालनम क्षमता विकास (संस्थागत क्षमता, व्यवस्थापकीय क्षमता, मानवसंशाधन व्यावस्थापन, स्रोत परिचालन व वित्तीय व्यावस्थापन, कार्यविधिर कार्य प्रणाली आदि) कर्ना ।

(ध) स्थानीय सरकारहुुक्र केन्द्र, प्रदेशसे जारी हुुइलक ऐन, नियम, कानुनह स्थानीयकरण कर्टी लैजैना व लागु कर्ना ।


ओरौनी
केन्द्र, प्रदेश व स्थानीय स्तरम सुशासन कायम करकलाग लागि राजनीतिक नेतृत्व, सरकार, नीजि क्षेत्र, नागरिक समाज, कर्मचारीतन्त्र, विज्ञ, व्यवासययी, पेशाकर्मी लगायत आम नागरिकहुुक्र सहभागि हुइपर्था । सुशासनह प्रत्येक कार्यालय, दल, संगठन, समूह, संस्था, राज्यक सक्कुु अङ्ग, निकाय, संरचना व नेतृत्व तहम घनिभूत रूपम आघ बह्रैटी संमृद्ध नेपाल बनइना अठोटके साथ निश्वार्थ भावना लेख पइला बह्रैलसे सुशासन, विकास व संमृद्धि संभव बा, धेउर दुर नैहो ।
–लेखक थारु कल्याणकारिणी सभा दाङक सभापति हुइट ।

दंगीशरण खबर

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