गजल


माठ कहि बिन्दिया टोंहार, टलटल टल्कटी रह
लालिम भरल् मुस्कान टोंहार, झलझल झल्कटी रह

भरल् गग्रक पानीअस् भरल् बा, टोंहार जवानी
छैलनके आघ जवानी टाेंहार, छलछल छल्कटी रह

बानी परल बा, उ कमरिया हो छैली टोंहार
बरा बरा पुत्ठा टोंंहार, मलमल मल्कटी रह

बरा खुशी रठ मनै, यिहा अप्सरा रुपि रुप डेख्के
समाजके बिच ज्यान टोंहार, ढलढल ढल्कटी रह

लब्लिन क्यानभास फे, एक सजिव मनुवा न परल्,
जुनिजुनी मैयम टोंहार, पलपल पल्कटी रह

दंगीशरण खबर

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